जहाँ चाह वहाँ राह

जैसा कि सभी जानते हैं कोरोना काल की सबकी अपनी अपनी कहानियां है किसी ने बहुत कुछ खोया तो किसी ने बहुत कुछ पाया है | आज मैं इस बारे में एक अलग नजरिए से बात करना चाहती हूं | अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो मेरा सबसे पहला प्रश्न आपसे यह है कि 2020 से 2021 तक क्या कोई ऐसा काम है जो आपने किया हो और वह आपके लिए फायदेमंद साबित हुआ हो ? अगर हां तो आप सही रास्ते पर चल रहे हैं और अगर ना तो आपको अपने भविष्य के बारे में सोचने की बहुत आवश्यकता है | कोरोनावायरस ने ना ही सिर्फ बड़ों को बल्कि हर स्तर के लोगों को कुछ ना कुछ हानि पहुंचाई है | कई तरह के ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने अपना समय कुछ सीखने में कुछ करने में व्यतीत किया और वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सिर्फ खा पीकर पिक्चर देखकर या इधर-उधर मोबाइल चला कर अपना समय नष्ट कर रहे हैं | हम क्या कर रहे हैं , उससे हमें शायद फर्क ही नहीं पड़ रहा है , आज हमें यह जानना जरूरी है कि हमारे लिए क्या सही है और क्या गलत और जो हम कर रहे हैं इससे आने वाले समय पर क्या प्रभाव पड़ेगा | अभी तक आप सोच रहे होंगे यह सब तो घिसी पिटी बातें हैं जो एक साल से सुनते आ रहे हैं इसमें क्या नया है ? सोचने वाली बात यह है कि जो हमारे आज के युवा है वह सिर्फ अपना समय बर्बाद कर रहे हैं | यह बात मैं आपको एक कहानी से समझाती हूं  |

यह कहानी एक लड़की की है जो अभी पढ़ाई कर रही है उसके पास पढ़ने के अलावा अभी कोई और काम नहीं है  | जब मैंने उससे पूछा वह अपना समय कैसे व्यतीत कर रही हैं ? तब उसने मुझसे कहा मेरा ज्यादा से ज्यादा समय ऑनलाइन कक्षा में चला जाता है जिसमें कुछ मुझे समझ में आता है और कुछ इंटरनेट की समस्या के कारण समझ नहीं आता | फिर मैंने उससे पूछा कि क्या तुम खुद से पढ़ने की कोशिश नहीं करती ? उसने मुझसे कहा - एक दो बार कोशिश की है , लेकिन फिर मन नहीं लगता | मुझे बहुत आश्चर्य हुआ क्योंकि जब मैं पढ़ाई करती थी हमारा ज्यादा से ज्यादा समय सेल्फ स्टडी में जाता था और वह अंग्रेजी में कहते हैं ना "सेल्फ स्टडी इज द बेस्ट स्टडी" | वह शायद आजकल के बच्चे समझ नहीं पा रहे हैं | फिर मैंने उसको यह बात बताई क्यों सेल्फ स्टडी करना सबसे महत्वपूर्ण है | उसने मुझसे कहा , सेल्फ स्टडी तब अच्छी लगती है जब उस विषय में रुचि हो | मैंने कहा अगर रुचि के हिसाब से हम विषय को देखें तो जरूरी नहीं है कि अगर हमारे 8 विषय हैं तो हमें 8 विषय में रुचि हो , हो सकता है 1-2 विषय ऐसे हो जिसमें हमें रुचि ना हो लेकिन उसका मतलब यह नहीं कि आप उस विषय को पढ़े भी ना | फिर उसने मुझसे कहा ,क्या आप मुझे बता सकती हैं किस विषय में रुचि है उसे कैसे पता करें ? इस बात से मुझे समझ में आया ,  आज जो विद्यार्थियों की हालत है कि वह अपनी रूचि नहीं ढूंढ पा रहे हैं उसका एकमात्र कारण है कि वह चीजों को ध्यान से नहीं करते और किसी भी चीज को करने की कोशिश नहीं करते बस शिकायतों की लंबी लिस्ट तैयार करते रहते हैं |

यह छोटी सी कहानी से हो सकता है कि आपको समझ में आया हो आज हम जो कर रहे हैं उसके लिए हमें मेहनत करना पड़ेगी | कोई भी काम अपने आप नहीं होता उसके लिए स्वयं मेहनत करना होती है | मैंने कई ऐसे बच्चे देखे है अपने जीवन में जो जिज्ञासाओं से भरे हैं , जिन्हें सवाल पूछना बहुत पसंद है और यह बच्चे अपने जीवन में ऊंचाइयों को जरूर छूते हैं , क्योंकि जब तक आपके अंदर सवाल नहीं आएगा तब तक आप अपनी रुचि नहीं जान पाएंगे और जब तक किसी काम को करने में रुचि ना हो तब तक आप किसी भी कार्य को करने में समर्थ नहीं होंगे  |

अब प्रश्न आ रहा होगा कि यह सब सुनने में बहुत आसान है इसे करें कैसे ? इसका एक बहुत ही सीधा उत्तर है जिसे हम कहते हैं " लर्निंग बाय डूइंग "  अर्थात करते  हुए  सीखना  |  छोटे-छोटे प्रयास से ही बड़ी-बड़ी कामयाबियों  को हासिल किया जाता है | उदाहरण के तौर पर मैं ऐसा कहूं , अगर आप एक अच्छे वक्ता हैं तो आप किसी के भी सामने  बोलने में  हिचकिचाएंगे नहीं , किंतु इसके लिए आपको बोलना आना चाहिए और वह आप करते-करते सीखते हैं  | पहले आप अपने परिवार में बोलना सीखते हैं , फिर अपने दोस्तों में , अपने स्कूल कॉलेज में , अपनी नौकरी में ऐसे धीरे-धीरे आपकी बोलने की आदत हो जाती है और फिर आप घबराते नहीं हैं  | ऐसे ही हर कार्य के लिए है आप कोई भी कार्य शुरू करें और उसे करते रहे धीरे-धीरे आप उसमें महारत हासिल कर लेंगे  | आज का जो समय चल रहा है उसमें यह बहुत बड़ी उपलब्धि है कि आपके पास समय बहुत सारा है  | इस समय का आप भरपूर उपयोग कर सकते हैं नई चीजें सीखने में ताकि कल को जब सब सामान्य स्थिति में आएगा तब आप अनुभवी होंगे और चीजों को करने की क्षमता रखेंगे  | कहते हैं कर्म करो फल की चिंता मत करो , वैसे ही कार्य को करते जाएं अनुभव अपने आप होता जाएगा | खुद को इस काबिल बनाए कि कल को स्वयं से प्रश्न ना करना पड़े कि जो समय मिला था उसे मैंने क्यों गवा दिया | जीवन में असंभव शब्द नहीं होना चाहिए उसे आप संभव बना सकते हैं वह आपके हाथ में है | कोई भी चीज छोटी या बड़ी नहीं होती  | सीखने की कोई उम्र नहीं होती ,  कहते हैं ज्ञान का सागर बहुत बड़ा है जितना समेटे उतना ही बढ़ता जाता है | अपने ज्ञान को बढ़ाते रहिए और खूब उन्नति करिए |


कृति व्यास

विद्यार्थी एम.बी.ए , देवी अहिल्या विश्व विद्यालय  इंदौर , मध्य प्रदेश 


Comments

Popular posts from this blog

समय बलवान है